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हर चीज़ का एक समय होता है

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  कभी-कभी बहुत छोटी-छोटी चीज़ें बहुत गहरी बातें सिखा जाती हैं। पेड़ से गिरा हुआ पत्ता, चेहरे पर दिखी एक झुर्री, कटी हुई पतंग या ज़मीं पर गिरा हुआ सूखा फूल, इन सबको देखकर एक ख़याल आता है कि हर चीज़ का एक समय होता है। चढ़ाई का दौर है तो ढलान का भी समय तय है, ताक़त-जवानी है तो अशक्तता-बुढ़ापे का भी एक समय तय है, खिलना है तो मुरझाना भी निश्चित है। दरअसल  प्रकृति ने हमारे आसपास ही जीवन को जीने और समझने की सारी तरकीबें जुटा रखी हैं। देर होती है हमारे समझ पाने की। हम जीवन को और जीवन की तरकीबों को कितना समझ पाते हैं! आपने अक्सर अपने आसपास कोई सूखकर गिरा हुआ फूल देखा होगा या कट कर गिरती हुई पतंग देखी होगी। चंद सैकंड की ये घटनाएँ जीवन का कितना बड़ा सार लिए रहती हैं! लेकिन हम उस सार को कितना समझ पाते हैं, पकड़ पाते हैं, यह हमारे नज़रिए पर निर्भर करता है।